बिना डॉक्टर की सलाह के न ले आयुर्वेदिक दवा , जाने कब और कैसे हो जाते है नुकसानदेह

अनेको गुणों को समेटे आयुर्वेदिक दवाये हर तरह के रोगों को जड़ से मिटाने की क्षमता रखती है। लेकिन आयुर्वेदिक दवाओं की ये खूबियां घातक भी हो सकती हैं, अगर आप इसका खुद से इस्तेमाल करते हैं। आयुर्वेदिक दवाएं कब और कैसे नुकसान पहुंचा सकती हैं,

समय के बदलते दौर के साथ भी लोगो को आज भी आयुर्वेदिक दवाओं पर पूरा विस्वास है, कहते है कि आयुर्वेदिक दवा कभी भी नुकसान नहीं पहुचती, शरीर की किसी भी बीमारी को यह जड़ से मिटा सकती है इसी कारण आज कल आयुर्वेदिक दवाओं की मांग भी खूब है लेकिन कुछ लोग खुद ही आयुर्वेदिक दवाओं का उपयोग करने लगते है बिसेसज्ञ बताते है कि यह नुकसानदायक भी हो सकता है

ऐसे नियमों को जानना है जरूरी
आयुर्वेदिक दवाओं को उपयोग करने के लिए आयुर्वेदाचार्यों ने कुछ नियम बनाये हैं, जिसके अनुसार, सूर्योदय के समय, खाली पेट, दिन के समय भोजन करते समय, शाम के भोजन करते समय और रात में भोजन के बाद इन दवाओं को लेने का समय तय है। कुछ लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती, इस कारण वे इसका नुकसान भी उठाते हैं। इसलिए ऐसी दवाओं का उपयोग आपकी बीमारी का उपचार कर रहे आयुर्वेदाचार्य के निर्देशानुसार ही करना चाहिए

ज्यादा अति भी बुरी है
विशेषज्ञों के अनुसार, हर चीज की अति बुरी होती है। सेहत को दुरुस्त रखने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का उपयोग करते समय हमें उसकी सही मात्रा और सही समय के बारे में जानकारी नहीं होती और इसकी ज्यादा मात्रा हमारे लिए नुकसानदेह हो सकती है।

हमारे शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता और शारीरिक जरूरतों के हिसाब से अनेक रसायन, एंजाइम, हार्मोंस आदि समय-समय पर बदलते रहते हैं। अगर आप आयुर्वेदिक दवाओं का उपचार खुद करते हैं, तो इसका परिणाम नहीं मिलता और इसके विपरीत आपके शरीर को अंदर तक नुकसान भी पहुंचता है। आयुर्वेदिक दवाओं का उपयोग हर हाल में निर्धारित निर्देशों के हिसाब से करना चाहिए

ज्यादा गिलोय का सेवन ठीक नही

आयुर्वेद में गिलोय को अमृत भी कहा जाता है, जिसमें डायबिटीज से लड़ने के गुण होते हैं। लेकिन इसे भी किसी आयुर्वेदाचार्य के परामर्श से ही सेवन करे, क्योंकि इसका सेवन शुगर लेवल को प्रभावित करके पाचन-तंत्र को हानि पहुंचा सकता है। इससे कब्ज की समस्या उत्पन हो सकती है।

मेथी दाना खड़ी कर सकती है समस्या
डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर और पेट संबंधी समस्याओं के लिए सबसे फायदेमंद मेथी दाना होता है। आयुर्वेदिक औषधियों में से एक मेथी दाने के इस्तेमाल की सलाह खुद आयुर्वेदाचार्य भी देते हैं, लेकिन मेथी का स्वभाव काफी गर्म होता है। इसकी ज्यादा मात्रा से पित्त, गैस, दस्त और खून पतला होने का जोखिम बना रहता है।

जामुन से रखें थोड़ी दूरी
ज्यादातर लोग डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए जामुन का उपयोग करते हैं। आयुर्वेद के नजरिये से जामुन को सेहत के लिए सबसे बड़ा वरदान माना जाता है। लेकिन यह बात बहुत ही कम लोग जानते हैं कि इसके ज्यादा उपयोग से व्यक्ति का पाचन-तंत्र कमजोर हो जाता है।

दालचीनी के इस्तेमाल में बरतें सावधानी

गर्म मसालों और आयुर्वेदिक औषधि में दालचीनी का उपयोग कई समस्याओं को दूर करने में किया जाता है, लेकिन दालचीनी में लगभग 5 प्रतिशत कामरिन पाया जाता है। यह कामरिन लिवर को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए इसका सेवन करने से पहले आपको इसकी सही मात्रा की जानकारी होनी ही चाहिए, ताकि आप इसके दुष्प्रभाव से बचे रहें।

संभल कर करेले का इस्तेमाल
करेले को आयुर्वेदिक नजरिये से शरीर के लिए बहुत अच्छा माना गया है, लेकिन यह आपके पाचन-तंत्र को पूरी तरह खराब करने में भी सक्षम होता है। इसके बीजों में एक ऐसा तत्व पाया जाता है, जो आंतों तक प्रोटीन के संचार को रोक सकता है। इसके रस में मौजूद मोमोकैरीन नाम का तत्व पीरियड्स के फ्लो को बढ़ा देता है।

असर ना करे, तो सावधान हो जाएं

अगर आप बिना किसी डॉक्टर की सलाह के आयुर्वेदिक दवाएं ले रहे हैं, तो आपको खास सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर इन दवाओं से लाभ नही मिलता हैं, तो इसका मतलब यही होता है कि या तो आप इसे लेने का सही समय नहीं जानते या फिर इन दवाओं की मात्रा में अधिकता या कमी हो रही है।

अगर आप किसी छोटी या बड़ी बीमारी से परेसान हैं और आयुर्वेदिक उपचार को वरीयता देना चाहते हैं, तो विशेषज्ञ की सलाह के बगैर दवाओं का सेवन कभी भी ना करें। आम लोगों की सलाह से ज्यादा सफल सलाह किसी योग्य आयुर्वेदाचार्य की ही हो सकती है। इसलिए इसका लाभ उठाएं और सही दवा खाएं।